कविता - जन्म से लेकर आज तक अनथक दौड़ती जाती हूँ

कविता - जन्म से लेकर आज तक अनथक दौड़ती जाती हूँ

मैं भारतीय रेल 
आपके हर सुख दुख की साथी हूँ।
जन्म से लेकर आज तक अनथक दौड़ती जाती हूँ।।
राष्ट्र की रक्त शिराओं में निरतंर बहती
लघु भारत लेकर संग इठलाती
मंजिल पर सबको पहुंचाती
मैं भारतीय रेल
आपके सुख दुख की साथी हूँ।
कभी न रुकी कभी न थकी
देखो आज कोरोना से सुस्ताती हूँ।
इस संकट में मैं आज अश्रु बहाती हूँ।।
सूनी हैं पटरियां सूने हुए स्टेशन 
न है जनकोलाहल।
फिर भी दुःख सहते अन्न,ईंधन आदि पहुंचाती हूँ।
राष्ट्र विकास में श्रम और पसीना बहाने वाले श्रमिकों के सूखे अधरों पर उनके मुस्कान लाती, उन्हें गांवों तक पहुंचाती हूँ।
मैं भारतीय रेल आपके सुख दुख की साथी हूँ।

इंजन से नव प्रभात का हॉर्न बजाती फिर वही दिन आने की अलख जगाती हूँ।
महामारी से जड़ हुए राष्ट्र को अपने पहियों की गति से दौड़ाती हूँ।
चल पड़ी हूँ मैं फिर से बेधड़क, द्रुत वेग से
यात्रियों में विश्वास जगाती, अपनी जिम्मेदारी निभाती
फिर अपने उस गौरव को पाती हूँ।
मैं भारतीय रेल
आपकी हर सुख दुख की साथी हूँ।
 मैं भारतीय रेल .......
यह कविता उत्तर मध्य रेलवे प्रयागराज मंडल के 
श्री अमित कुमार द्विवेदी,
उपनिरीक्षक, रेल सुरक्षा बल
प्रयागराज पोस्ट द्वारा रचित है।  

कविता को स्वर दिया है 
 श्री अमित की धर्मपत्नी 
श्रीमती सुरुचि शर्मा
निरीक्षक ,प्रशासन पोस्ट
प्रयागराज। 


BBC LIVE NEWS
 चीफ ब्यूरो प्रयागराज
 परवेज आलम