क्या वाकई बाबा रामदेव ने खांसी-जुकाम का लायसेंस लेकर किया कोरोना की दवा बनाने का दावा

क्या वाकई बाबा रामदेव ने खांसी-जुकाम का लायसेंस लेकर किया कोरोना की दवा बनाने का दावा

क्या वाकई बाबा रामदेव ने खांसी-जुकाम का लायसेंस लेकर किया कोरोना की दवा बनाने का दावा

रूपी से राकेश की रिपोर्ट

पतंजलि द्वारा निर्मित कोरोना वायरस के लिए कोरोनिल दवाई लॉन्च होते ही विवादों में घिर गई है। बुधवार को बाबा रामदेव की दवा को एक और झटका लगा है। इस बार उत्तराखंड की आयुर्वेद ड्रग्स लाइसेंस अथॉरिटी ने बाबा की दवा पर सवाल उठाया है। वहीं, मंगलवार को स्वामी रामदेव और आचार्य बालकृष्ण द्वारा दवाई लॉन्च किए जाने के बाद भारत सरकार के आयुष मंत्रालय ने दवाई के प्रचार प्रसार पर रोक लगा दी थी।

खांसी जुकाम का लायसेंस कैसे बनी दवा:उपनिदेशक

समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक, अथॉरिटी के उपनिदेशक यतेंद्र सिंह रावत ने कहा, बाबा रामदेव की कंपनी पतंजलि को कोरोना की दवा के लिए नहीं बल्कि इम्युनिटी बूस्टर और खांसी-जुकाम की दवा के लिए लाइसेंस जारी किया गया था।लेकिन उन्हें मीडिया के माध्यम से ही पता चला कि बाबा रामदेव की कंपनी पतंजलि द्वारा कोरोना की किसी दवा का दावा किया जा रहा है।


बाबा रामदेव समेत बालकृष्ण को नोटिस जारी

रावत ने कहा 'भारत सरकार का निर्देश है कि कोई भी कोरोना के नाम पर दवा बनाकर उसका प्रचार-प्रसार नहीं कर सकता। आयुष मंत्रालय से वैधता मिलने के बाद ही ऐसा करने की अनुमति होगी। उन्होंने कहा कि फिलहाल, विभाग की ओर से पतंजलि को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया गया है। योग गुरु बाबा रामदेव की पतंजलि आयुर्वेद ने कोविड-19 के इलाज में शत-प्रतिशत कारगर होने का दावा करते हुए मंगलवार (23 जून) को बाजार में एक टैबलेट उतारी। इस दवा का नाम 'दिव्‍य कोरोनिल टैबलेट' (Divya Coronil Tablet) है।

बिना किसी सूचना के ही किया दवा निर्माण:नाईक

इस मद्दे पर आयुष मंत्री श्रीपद नाइक का बयान आया है। श्रीपद नाइक ने कहा है, ''यह अच्छी बात है कि बाबा रामदेव ने देश को एक नई दवा दी है, लेकिन नियम के अनुसार, पहले जांच के लिए उसे आयुष मंत्रालय में आना होगा। उन्होंने यहां तक कहा कि उन्होंने ( पतंजलि) एक रिपोर्ट भेजी है। हम इसे देखेंगे और रिपोर्ट देखने के बाद अनुमति दी जाएगी।''

चेतावनी:जांच-पड़ताल होने तक दवाई का प्रचार ना करें बाबा

योग गुरु बाबा रामदेव द्वारा कोरोना किट लॉन्च करने के कुछ घंटे बाद 23 जून को आयुष मंत्रालय ने कहा था कि पतंजलि को इस औषधि में मौजूद विभिन्न जड़ी-बूटियों की मात्रा एवं अन्य ब्योरा यथाशीघ्र उपलब्ध कराने होगा। आयुष मंत्रालय ने साथ में यह भी कहा कि विषय की जांच-पड़ताल होने तक कंपनी को इस उत्पाद का प्रचार भी बंद करने का आदेश दिया है।

देना पडेगा अध्ययन, अनुसंधान व निर्माण के तथ्य का पूरा ब्यौरा
 
आयुष मंत्रालय ने कहा था कि इस दवा के तथ्य और बताया जा रहे वैज्ञानिक अध्ययन के ब्योरे के बारे में उसे जानकारी नहीं है। पतंजलि को नमूने के आकार, स्थान एवं उन अस्पतालों का ब्योरा देने को कहा गया था, जहां अनुसंधान अध्ययन किया गया। साथ ही, संस्थागत नैतिकता समिति की मंजूरी भी दिखाने को कहा गया है।